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देहरादून:

ABVP 71st  national session dehradun CM Dhami


 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को परेड ग्राउण्ड, देहरादून में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 71 वें राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रो. यशवंत राव केलकर युवा पुरुस्कार से गोरखपुर के श्री श्रीकृष्ण पांडेय को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि श्री पांडेय ने ‘बाल भिक्षावृत्ति निर्मूलन’, ‘निस्सहाय मनोरोगियों की सेवा’ तथा ‘कारागार बंदियों के पुनर्वास’ की दिशा में कार्य करते हुए सामाजिक उत्तरदायित्व का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।


मुख्यमंत्री ने देशभर से आये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले वे भी विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में विद्यार्थियों के बीच सक्रिय रूप से कार्य करते थे। उन अनुभवों ने उन्हें नेतृत्व और संगठन की समझ देने के साथ ही समाज सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया। वे मूल्य और आदर्श उनके जीवन की आधारशिला की तरह हैं, उन्हें प्रतिदिन अनुशासन के साथ सेवा पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का यह राष्ट्रीय अधिवेशन कोई साधारण आयोजन नहीं है, बल्कि राष्ट्रनिर्माण के पवित्र यज्ञ के प्रति समर्पित ऊर्जावान युवाओं का महासंगम है।


मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि इस मंच से निकलने वाले विचार और संकल्प राष्ट्र निर्माण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे और देश के विकास और सामाजिक प्रगति को नई दिशा प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि 1949 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का निर्माण हुआ, देश एक नए युग की ओर बढ़ रहा था। ऐसे समय में राष्ट्र निर्माण, समाज सुधार और सांस्कृतिक जागरण के लिए एक संगठित, जागरूक, संस्कारित और राष्ट्रवादी छात्रशक्ति की आवश्यकता थी। यह संगठन 77 वर्षों से व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का कार्य करता आ रहा है। विद्यार्थी परिषद राष्ट्र के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और वैचारिक क्षेत्रों में भी व्यापक परिवर्तन लाने वाली अग्रणी शक्ति बनकर उभरा है। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की युवा शक्ति हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है, जो अपने परिश्रम, प्रतिभा और संकल्प के बल पर सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करने की क्षमता रखती है। इस ऊर्जा को सही दिशा और मार्गदर्शन से देश पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित होगा। इस ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करके ही हम एक भारत, श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के  नेतृत्व में युवा शक्ति को राष्ट्र शक्ति मानकर विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में निरन्तर कार्य किये जा रहा है। आज स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, फिट इंडिया और नई शिक्षा नीति जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से युवाओं को उनकी प्रतिभा और क्षमता के अनुसार अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।


इस अवसर पर केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

 

 *22 देशों के 300 से अधिक खिलाड़ियों ने दिखाया दम; मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से किया संवाद* 

 *टिहरी झील बनेगी अंतरराष्ट्रीय एडवेंचर स्पोर्ट्स हब—मुख्यमंत्री ने कही बड़े आयोजन जारी रखने की बात* 

 *उत्तराखंड खेलों की नई ऊंचाई पर—राष्ट्रीय खेलों में 103 मेडल और 7वां स्थान पाकर ‘खेलभूमि’ के रूप में उभरता राज्य* 

 *राज्य में बनेगी 23 नई खेल अकादमियाँ, हर साल 920 इंटरनेशनल एथलीट तैयार होंगे: मुख्यमंत्री* 

 *खेल भावना ही असली जीत- सीएम* 

 *विजेता खिलाड़ियों को किया सम्मानित* 


Tihri  water  spirts games  2025


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को टिहरी झील में आयोजित “इंटरनेशनल प्रेसीडेंट कप-2025’’ एवं “चतुर्थ टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप-2025’’ के भव्य समापन समारोह में पहुँचे। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचकर उन्होंने भारत और विभिन्न देशों से आए खिलाड़ियों से संवाद किया तथा उनके उत्साह और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 22 देशों के 300 से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है तथा टिहरी झील को वैश्विक साहसिक खेल मानचित्र पर स्थापित करती है।


समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और खेल प्रेमियों का स्वागत किया और आयोजन को सफल बनाने के लिए टीएचडीसी, एशियन कायकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन, उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन सहित सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टिहरी झील अब केवल ऊर्जा उत्पादन या जल प्रबंधन का केंद्र नहीं रह गई है, बल्कि पर्यटन, साहसिक खेलों और स्थानीय लोगों की आजीविका के नए अवसरों का सबसे बड़ा आधार बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि यहां समय-समय पर ऐसे आयोजन होते रहें, ताकि साहसिक खेलों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को भी निरंतर बढ़ावा मिल सके।



मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल न केवल युवाओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं बल्कि अनुशासन, टीमवर्क और संघर्षशीलता जैसी आवश्यक जीवन मूल्यों को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को मजबूत बनाने के प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय खेलों में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले भारतीय खिलाड़ियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा 2023 में चीन में हुए एशियाई खेलों में भारत ने रिकॉर्ड 107 पदक जीतकर नया इतिहास रचा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत 2030 में अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा और केंद्र सरकार ने खेल बजट को भी तीन गुना बढ़ाया है।



मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों की सफलता ने राज्य को “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित किया है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि राज्य के खिलाड़ियों ने पहली बार राष्ट्रीय खेलों में 103 पदक जीतकर 7वाँ स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना तैयार करने की दिशा में लगातार कार्य किया है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तराखंड अब अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी करने में सक्षम हो चुका है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में देहरादून स्पोर्ट्स स्टेडियम में स्थित आइस रिंक में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसने भारत में शीतकालीन खेलों के एक नए युग का द्वार खोला है।



मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य में शीघ्र ही “स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान” लागू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियाँ स्थापित की जाएँगी। इन अकादमियों में प्रत्येक वर्ष 920 अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट और 1000 अन्य खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार हल्द्वानी में राज्य का पहला खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने के लिए भी तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि नई खेल नीति के अंतर्गत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है, वहीं स्पोर्ट्स कॉलेजों में प्रशिक्षण और शिक्षा निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना, उदीयमान खिलाड़ी योजना, खेल-किट योजना, मुख्यमंत्री खेल विकास निधि, खेल छात्रवृत्ति, उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार, हिमालय खेल रत्न पुरस्कार और प्रशिक्षकों के लिए देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य अवार्ड जैसी व्यवस्थाएँ राज्य में खेलों के व्यापक विकास के लिए प्रभावी रूप से लागू की जा रही हैं। इसके साथ ही राजकीय सेवाओं में खिलाड़ियों के लिए चार प्रतिशत खेल-कोटा भी पुनः लागू किया गया है।


समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के विजयी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि खेल में हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण खेल भावना है और यह प्रसन्नता की बात है कि सभी खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से सकारात्मक खेल-भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने राज्य के युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करते रहें। उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार उनके सपनों को पंख देने और हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए सदैव तत्पर रहेंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड और देश के खिलाड़ी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम और अधिक ऊँचा करेंगे।


कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, विधायक श्री किशोर उपाध्याय, जिलाधिकारी सहित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी, आयोजन समिति टीएचडीसी के सीएमडी सीपन गर्ग , देश और विश्व भर से आए हुए खिलाड़ी व स्थानीय जनता उपस्थित रही |


*रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ढाई मिनट का अंश उत्तराखंड पर केंद्रित रहा*

man ki baat PM Modi 30nov 2025


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तराखंड के प्रति अपने विशेष स्नेह को प्रकट करते हुए राज्य में विंटर टूरिज्म, साहसिक खेलों, वेडिंग डेस्टिनेशन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए, देशवासियों से सर्दियों के सीजन में हिमालय की वादियों का अनुभव लेने की अपील की है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी, उत्तराखंड टूरिज्म के सबसे बड़े ब्रांड एम्बेस्डर हैं।  


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात” कार्यक्रम में करीब ढाई मिनट उत्तराखंड को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि इन दिनों उत्तराखंड का विंटर टूरिज्म लोगों को खूब लुभा रहा है। सर्दियों के मौसम में औली, मुनस्यारी, दयारा, चोपता जैसी जगहें लोकप्रिय हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ सप्ताह पहले ही पिथौरागढ़ में साढ़े 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई ऑल्टीट्यूट अल्ट्रा रन मैराथन आयोजित की गई, जिसमें देशभर के 18 राज्यों से 750 से अधिक एथिलीट ने भाग लिया। 60 किमी लंबी आदि कैलाश परिक्रमा रन का प्रारंभ कड़कड़ाती ठंड में सुबह पांच बजे हुआ, इतनी ठंड के बावजूद प्रतिभागियों का उत्साद देखते ही बनता था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तीन साल पहले तक आदि कैलाश की यात्रा पर प्रतिवर्ष मात्र दो हजार लोग ही आते थे, अब यह संख्या 30 हजार तक पहुंच गई है। 

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन की प्रशंसा करते हुए कहा कि कुछ ही हफ्तों में उत्तराखंड विंटर गेम्स का भी आयोजन करने जा रहा है, जिसमें प्रतिभाग करने के लिए देशभर के खिलाड़ी, एडवेंचर प्रेमी और खेलों से जुड़े लोग उत्साहित हैं। उन्होंने उत्तराखंड में बढ़ती पर्यटन आधारभूत सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने विंटर टूरिज्म को बढावा देने के लिए कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष तौर पर फोकस किया है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने होम स्टे के लिए नई पॉलिसी भी बना दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड में डेस्टिनेशन वेडिंग की ब्रांडिंग करते हुए कहा कि सर्दियों की सुनहरी धूप और पहाड़ों से उतरते कोहरे के बीच, उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी लोकप्रिय हो रहा है। खासकर गंगा जी के किनारे अब खूब डेस्टिनेशन वेडिंग हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि वो, सर्दियों में कहीं जाने का विचार कर रहे हैं तो हिमालय की वादियों को अपने विकल्प के रूप में जरूर शामिल करें, हिमालय की वादियां आपको जीवनभर साथ चलने वाली अनुभूतियों से भर देंगी। 


*पीएम के दौरे से बढ़ा पर्यटन*

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड आगमन हर बार, यहां के पर्यटन को नई गति प्रदान कर जाता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले श्री केदारनाथ, श्री बद्रीनाथ, आदि कैलाश और जागेश्वर धाम की यात्रा पर आ चुके हैं, जिसके बाद इन तीर्थ स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। इसी तरह प्रधानमंत्री गत वर्ष उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन का शुभारंभ करने उत्तरकाशी के मुखबा गांव में पहुंचे, इसके बाद से पूरी हर्षिल घाटी में पर्यटन गतिविधियों में तेजी नजर आ रही है। जिससे स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर विकसित हो रहे हैं।

*धामी सरकार के कार्यों पर पीएम की मुहर*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में गत वर्ष से सरकार शीतकालीन यात्रा भी संचालित कर रही है। सरकार राज्य में वेडिंग डेस्टिनेशन को भी बढ़ावा दे रही है, अब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार के प्रयासों की तारीफ करते हुए, एक तरह से धामी सरकार के कार्यों पर अपनी सकारात्मक मुहर लगा दी है। 

*देवभूमि उत्तराखंड के सतत विकास और संभावनाओं को विश्व पटल पर रेखांकित करने के लिए समस्त प्रदेशवासी आदरणीय प्रधानमंत्री जी के आभारी हैं। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री जी के संकल्प के अनुसार उत्तराखंड को प्राकृतिक, आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के मानचित्र पर उभारने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है।*

*पुष्कर सिंह धामी, मख्यमंत्री*

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आतंक के सरगना बनने की होड लगी है मदनियों में; सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले: डॉ सुरेन्द्र जैन

नई दिल्ली



कल भोपाल में जमीयत प्रमुख मौलाना मदनी द्वारा दिए गए कट्टरपंथी वक्तव्य की विश्व हिंदू परिषद ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग की है। 

.अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने आज कहा कि बड़े मदनी हों या छोटे मदनी, दोनों में मुस्लिम समाज को भड़काने की होड़ लगी है। दोनों जुटे हैं कि कौन पहले लादेन या बगदादी बनता है। 

उन्होंने कहा कि चांदनी चौक में जिस प्रकार का बम विस्फोट किया गया, पूरे देश में आतंकवादी घटनाएं करने की तैयारी पूरे देश में चल रही थी। एक पूरी यूनिवर्सिटी को जिस प्रकार से आतंकवादियों का अड्डा बना दिया गया था, केवल मदरसों में पढ़े हुए नहीं, सरकारी कॉलेज में पढ़े हुए डॉक्टर भी इस आतंकवादी गिरोह के सरगना बनकर खड़े हो गए। 

क्या इनको किसी भी तरीके से कोई डिफेंड कर सकता है? उनको डिफेंड करने के साथ-साथ ये दोनों मौलाना इस होड़ में लगे हैं कि भारतीय संविधान, न्यायपालिका, प्रशासन, हिंदू समाज और देश की समस्त व्यवस्थाओं के खिलाफ मुस्लिम समाज को कैसे भड़काया जा सके! 


डॉ जैन ने कहा कि क्या ये मौलाना नहीं जानते कि कहीं रोटियों पर थूक लगाया जा रहा है, कहीं लव जिहाद के नाम पर हिन्दू बहनों से बलात्कार कर उनके टुकड़े किए जा रहे हैं! कल ही एक मामले में कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया है। ऐसे सब मामलों पर पर्दा डालने के लिए ही शायद इन्होंने मुस्लिम समाज को भड़काने का यह मार्ग अपनाया है। 

उन्होंने चेताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विरोध में जिस प्रकार का वक्तव्य इन्होंने दिया है वह घोर आपत्तिजनक है। कब तक बाबरी मस्जिद का रोना रोते रहोगे? यह ध्यान कर लेना कि बाबर और बाबरी के नाम पर कोई अवशेष अब भारत की जनता स्वीकार नहीं करेगी! मुस्लिम समाज का बाबर से क्या लेना देना? उस विदेशी दुष्ट के नाम पर आप बार-बार मुस्लिम समाज को भड़काना चाहते हैं? चाहे वक़्फ़ बोर्ड का मामला हो या ट्रिपल तलक का, सब देश हित में उठाए गए संसदीय कदम ही तो हैं! वक्त बोर्ड और हलाल सर्टिफिकेशन के ऊपर जो पूरे देश में वातावरण बन रहा है और उसके नाम पर तुमने जो लूट मचा रखी थी, वह सामने आ गई तो बौखला गए? उस पैसे का उपयोग आतंकवादियों का केस लड़ने, हिंदुओं पर हमला करने वाले लोगों की सुरक्षा और उनको बचाने के लिए कर रहे थे! इसी की परेशानी है आपको? ये भाषण घोर आपत्तिजनक और देश के विरुद्ध खुली बगावत का ऐलान है जिसको कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता। 

मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अपील करूंगा स्वत: संज्ञान लें और इन राष्ट्रविरोधी वक्तव्यो के ऊपर लगाम लगाएं और इन लोगों को इनकी सही जगह बताएं! हम इनके भाषणों का अध्ययन करेंगे, जो कानूनी कार्यवाही करनी है वह भी करेंगे लेकिन ध्यान कर लेना कि तुम मुस्लिम समाज को बर्बादी की ओर ले जा रहे हो! किसी भी प्रकार से इस बगावत को सहन नहीं किया जाएगा। हर स्तर पर इसका मुकाबला किया जाएगा।


 


जनसेवा केंद्र पर बिना आवेदकों के हस्ताक्षर के पाए गए दस्तावेज; पूछने पर जानकारी नहीं दे पाए सीएससी में कार्यरत स्टॉफ

तहसील परिसर स्थित रमन इन्टरप्राईजेज पर निरीक्षण के दौरान पाई गई अनियमियता

केंद्र में विभिन्न सेवाओं हेतु निर्धारित दर से अधिक शुल्क वसूली; अग्रिम आदेशों तक केंद्र संचालन किया बंद

उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी के नेतृत्व में जिला प्रशासन की कार्रवाई

जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले के सीएससी सेंटर में चल रहा है छापेमारी अभियान निरंतर रहेगा जारी; अनियमितता पाए जाने पर लगेगा ताला

देहरादून  :



।जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर जिला प्रशासन की टीम ने तहसील परिसर अवस्थित रमन एन्टरप्राईजेज, सीएससी सेंटर में औचक निरीक्षण एवं छापेमारी की कार्रवाई की। यह कार्रवाई  उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी  के नेतृत्व में की गई।

जिला प्रशासन द्वारा अनियमितता पाए जाने पर सीएससी सेंटर को सील करते हुए केंद्र पर ताला जड़ दिया है। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर अनियमिताएं पाई गई ।
जनसेवा केंद्र पर विभिन्न योजनाओं के आवेदन अभिलेख पाए गए जिनमें आवेदकों के हस्ताक्षर नही थे।
 टीम द्वारा अभिलेखों के बारे में पूछे जाने पर सेंटर में मौजूद स्टॉफ जानकारी नहीं दे पाए साथ ही विभिन्न प्रमाण पत्र बनाने हेतु निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली करना पाया गया तथा 27 नवम्बर 2025 से दैनिक रजिस्टर अद्यतन नही किए जाने व अन्य कई अनियमितताएं पाई गई। जिस पर जिला प्रशासन द्वारा सेन्टर को सील करते हुए अग्रिम आदेशों तक केंद्र का संचालन बंद कर दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले के सीएससी सेंटर में छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है 

सीएससी केन्द्रो पर अनियमितता पाए जाने पर ताला लगेगा।
निरीक्षण के दौरान टीम द्वारा केंद्र में संचालित विभिन्न सेवाओं, अभिलेखों, लेन-देन विवरणों तथा सेवा शुल्क आदि की गहन जांच की गई। जांच में कई अनियमितताएं, नियमों का अनुपालन न होना एवं सेवा प्रदायगी में गंभीर त्रुटियां पाई गईं। केंद्र संचालक द्वारा संतोषजनक उत्तर न दिए जाने एवं अनियमितताओं के प्रमाण मिलने पर प्रशासन ने देवभूमि सीएससी सेंटर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन-सेवा से जुड़े किसी भी केंद्र पर अनियमितता, उपभोक्ता शोषण या पारदर्शिता का अभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 
उन्होंने कहा कि “जनहित सर्वाेपरि है, और सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु प्रशासन निरंतर सघन निरीक्षण अभियान जारी रखेगा।” इस कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक टीम  के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।



‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ ने दी कराहती सांसों को संजीवनी की सौगात



संसार भर में भारत की मानवतावादी नीतियों का डंका एक बार फिर बज उठा। श्रीलंका के बाढ पीडितों तथा अफगानिस्तान के मरीजों हेतु भारत ने खाद्यान्न और चिकित्सीय सामग्री सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की सहायता समय रहते पहुंचाकर लोगों का दिल जीत लिया है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की मानवीय सिद्धान्त पर विश्वास करने वाले भारत ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ को हमेशा ही अंगीकार किया जबकि अनेक देश निहित स्वार्थों के लिए जीवित जीवनियों को आतंकवाद की भेंट चढाने के षडयंत्र को ही अपना धर्म मानते हैं। अतीत में अनेक देशों से मिले कटुअनुभवों को भुलाकर वहां की कराहती मानवता की सहायता करने में देश निरंतर अग्रणीय रहा है। भारत की मानवीय सहयोग की मानसिकता के चन्द उदाहरण ही उसके देवत्व को स्थापित करने के लिए पर्याप्त है। कलुषित मानसिकता वाले तुर्किये का नाम इन उदाहरणों में सबसे ऊपर आता है। एहसान फरामोश तुर्किये ने पाकिस्तान के साथ जुगलबंदी करके ‘आपरेशन सिंदूर’ के दौरान शत्रुता की भूमिका का खुलकर निर्वहन किया था जबकि भारत ने प्रथम विश्व युद्ध से निर्मित समस्याओं से लेकर सन् 2023 में आयी प्राकृतिक आपदाओं तक में उसका भरपूर सहयोग किया था। सन् 1914 से लेकर 1918 तक चले प्रथम विश्व युद्ध के दौरान आटोमन साम्राज्य, जिसे वर्तमान में तुर्किये कहा जाता है, ब्रिटिश तथा उसकी सहयोगी सेनाओं से लड रहा था, तब भारत ने आटोमन साम्राज्य के समर्थन में ‘खिलाफत आन्दोलन’ चलाया था। उस समय आर्थिक मदद के अलावा भारतीय मेडिकल मिशन ने चिकित्सीय उपकरणों, दवाओं सहित इलाज हेतु चिकित्सकों का एक दल भेजा था जिसका नेतृत्व डा. एम.ए. अंसारी ने किया था। उस समय भारत स्वयं गुलामी की बेडियों मे जकडा था परन्तु स्वयं की परवाह न करते हुए तुर्कों की सहायता की थी। अगस्त 1999 में तुर्किये के मारमारा क्षेत्र में 7.6 तीव्रता का भूकंप आया जिसमें 17 हजार से अधिक लोगों की मौतें और लाखों लोग बेघर हो गये थे। तब भी भारत ने भारी मात्रा में राहत सामग्री, चिकित्सीय सहायता भेजी थी। साल 2020-2021 के दौरान कराहते तुर्किये को भारत ने जरूरी दवाइयां, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और पैरासिटामोल सहित ऑक्सीजन सिलेंडर, वैंटिलेटर, और मास्क आदि मेडिकल सामग्री मुहैया कराई थी। 'वैक्सीन मैत्री' के तहत भी तुर्किये को कोविशील्ड वैक्सीन की खेपें भेजी थी जबकि भारत स्वयं इस महामारी से जूझ रहा था। फरवरी 2023 में तुर्किये और सीरिया में 7.8 तीव्रता का भयानक भूकंप आया। इस आपदा में 50 हजार से अधिक अधिक मौतें हुईं, लाखों लोग बेघर हुए और भारी तबाही हुई। उस दौरान भारत ने ‘ऑपरेशन दोस्त’ चलाया और राहत कार्यों के लिए 150 विशेषज्ञों के तीन दल भेजे थे जिसमें चिकित्सक, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल तथा सहयोग पार्टियां भेजीं थी। भारत के खोजी कुत्तों, बचाव उपकरणों खोजी विशेषज्ञों ने मलबे में फंसे अनगिनत लोगों की जान बचाई थी। भारतीय सेना ने 30 बेड का एक फील्ड हॉस्पिटल बनाकर अपनी 99 सदस्यीय मेडिकल टीम के द्वारा प्रभावितों को इलाज किया। तब देश से सैकडों टन राहत सामग्री एवं चिकित्सीय सामान लेकर भारतीय वायुसेना के C-17 और C-130 विमानों ने तुर्की की उडान भरी थी। उस समय वहां की जनता और सरकार ने भारतीय सहायता की प्रशंसा में जमकर कसीदे पढे थे परन्तु दोगली नीतियों का सिरमौर बनकर उसने भी भारत की पीठ में छुरा भौंकने की कोशिशें की। इसी तरह रोहिंग्याओं की समस्या के जनक म्यांमार के सागाइंग, मांडले, मैगवे, शान, पी ताव और बागो में विगत 28 मार्च 2025 को तीव्र भूकंप आया था। वहां सहायता पहुंचाने वालों में सबसे ऊपर भारत का नाम अंकित है जिसने ‘आपरेशन ब्रहमा’ तहत भूकंप प्रभावितों हेतु भारतीय वायुसेना के शक्तिशाली सी-17 विमानों द्वारा हवाई मार्ग से, भारतीय नौसेना के आईएनएस करमुक, लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी, आईएनएस सतपुड़ा, आईएनएस सावित्री, आईएनएस घड़ियाल जहाजों से समुद्री मार्ग से 900 टन से अधिक राहत सामग्री तत्काल पहुंचाई थी। भारतीय सेना की शत्रुजीत ब्रिगेड की ‘एयरबोर्न एंजेल्स’ विशिष्ट टीम, इंडियन आर्मी फील्ड हॉस्पिटल यूनिट के 118 सदस्यों की सेवाओं वाला 200 बिस्तर युक्त अतिआधुनिक फील्ड अस्पताल, आपदा प्रबंधन में महारत रखने वाले खोजी एवं सहायता दल पहुंचाये थे जिनकी सेवाओं ने पीडितों को तत्काल राहत पहुंचाई थी। इसी तरह से अब अफगानिस्तान तथा श्रीलंका में भी भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान भरकर राहत सामग्री लेकर देवदूत की तरह पहुंच गये। वहां के नागरिकों के चेहरों पर मुस्कान खेलने लगी। अफगानिस्तान को 73 टन चिकित्सीय सामान भेजा है जिसमें जीवन रक्षक दवाएं, वैक्सीन, एंटी-वायरल दवाएं, सर्जिकल उपकरण, अस्पतालों के लिए जरूरी दवाइयां और अन्य चिकित्सा सामग्री शामिल है। उल्लेखनीय है कि इसी समय पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान पर हमले कर रहा है जिससे दौनों देशों के मध्य तनाव चरम सीमा पर पहुंचता जा रहा है। आतंकी हमलों पर आरोपों-प्रत्यारोपों का बाजार गर्म है। पाकिस्तान अपनी चरमपंथी नीतियों के तहत कट्टरता की आड में आतंक को संरक्षण देने के लिए समूचे संसार में जाना जाता है। भारत की मानवीय सहायता को लेकर पाक सरकार के उत्तरदायी लोग विकृत बयानों द्वारा परिभाषित कर रहे हैं। दूसरी ओर अफगानिस्तान के नागरिकों की आभार भरी टिप्पणियों के अलावा वहां के विदेश मंत्रालय ने इस सहायता को अफगानिस्तान के लोगों के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया। इसी तरह अक्टूबर 2025 में भी भारत ने अफगानिस्तान को अतिआधुनिक उपकरणों से युक्त 20 एम्बुलेंस, भारी मात्रा में चिकित्सीय उपकरण देने के साथ-साथ छह नई स्वास्थ्य परियोजनाओं की घोषणा थी। वही दूसरी ओर श्रीलंका में हफ्तों से हो रही भारी बारिश और बाढ़ से एक बडा भूभाग प्रभावित हो रहा है जिससे हजारों लोगों के सामने जीवन की आधारभूत सुविधाओं का टोटा पडा है। भूस्खलन, बाढ और निरंतर हो रही बरसात से कई क्षेत्रों में घर डूब गए, सड़कें टूट गईं और प्रभावित क्षेत्रों के वासिन्दे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। इस प्राकृतिक आपदा में भारत ने तुरंत अपनी वायुसेना के सी-130जे विमान से 15 टन से अधिक राहत वहां के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केन्द्र को सौंपी जिसमें टेंट, तारपोलीन शीट्स, कंबल, हाईजीन किट, पानी शुद्ध करने की गोलियां, सोलर लैंप और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल हैं। श्रीलंका में बारी बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड से अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। डेढ़ लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। भारत की दरियादिली और मानवतावादी विचारधारा ने हमेशा ही कराहती सांसों को संजीवनी की सौगात भेंट की जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। वह दिन दूर नहीं जब इस तरह के सकारात्मक कृत्यों से भारत एक बार फिर विश्वगुरु के सिंहासन पर आसीत होगा। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।


देहरादून:




आज दिनांक 29 नवंबर 2025 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 71वें अधिवेशन के स्वागत समारोह में भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल जी के नेतृत्व में 71स्थान पर स्वागत कार्यक्रम किए गए। 

महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल  ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्व का सबसे बड़ा छात्र राष्ट्र संगठन है जो कि विद्यार्थियों के बीच में युवाओं को नई दिशा देने का काम करता है जिसके तहत हम सब लोग का सौभाग्य की बात है उसका राष्ट्रीय अधिवेशन हमारे उत्तराखंड के देहरादून जिले में हुआ है हम सभी देशभर से आए हुए विद्यार्थी परिषद के सभी प्रतिनिधियों का स्वागत अभिनंदन करते हैं साथ ही देश की बहुमुखी प्रतिभा का उत्तराखंड देवभूमि अभिनंदन करती है मुझे लगता है कि आज देवभूमि की में लघु भारत का दर्शन एक मार्गदर्शन नहीं एक चेतना के रूप में उत्तराखंड एवं विश्व भर में क्रांति के रूप में विकसित होगा।



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